ARTIFICIAL INTELLIGENCE AND MACHINE LEARNING

ARTIFICIAL INTELLIGENCE

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संदर्भ

ARTIFICIAL INTELLIGENCE AND MACHINE LEARNING

नीति आयोग  ने जून 2018 मे  “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय रणनीति” नामक एक चर्चा पत्र जारी किया था । वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट मे भी  कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) का उल्लेख किया गया है ।

 

 

ARTIFICIAL INTELLIGENCE और MACHINE LEARNING क्या है ?

Intelligence Power हम मनुष्य के अंदर अपने आप बढ़ती है ।

कुछ देख कर, कुछ सुन कर, कुछ touch करके हम यह सोच लेते हैं की उस चीज़ के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। ठीक इसी तरह से मशीन के अंदर भी एक तरह का Intelligence Develop कराया जाता है. जिसको Artificial Intelligence(AI) कहते हैं।

AI कोई नई घटना नहीं है, 1950 के दशक से ही इसके बहुत से सैद्धांतिक और तकनीकी आधारो को अनेक कंप्यूटर वैज्ञानिकों जैसे एलन ट्यूरिंग, मार्विन मिनस्की और जॉन मैकार्थी द्वारा समझाया गया है । यह पहले से ही कई उद्योगों और सरकारों में कुछ हद तक अस्तित्व में है। अब, लगभग असीमित कम्प्युटर शक्ति और डाटा भंडारण की कम लागत के चलते हम उस दौर मे आ गए हैं जहा हम विशाल होते डाटा से उपयोगी मूल्यवान आँकड़ो को निकाल सकते हैं । मैट्रिक्स, आई रोबोट, टर्मिनेटर, ब्लेड रनर जैसी फिल्मों का आधार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ही है।

 

ARTIFICIAL INTELLIGENCE प्रौद्योगिकियों का एक जाल है जो मशीनों को उच्च स्तर की बुद्धिमत्ता के साथ कार्य करने में सक्षम बनाता है और भावना, समझ और मानवीय क्षमताओं का अनुकरण करता है। इस प्रका एक कंप्यूटर चित्र , ध्वनि और भाषण को संसाधित और प्रसंस्कृत करके  आसपास की दुनिया को सक्रिय रूप से अनुभव कर सकता है। इन मानवीय क्षमताओं को अनुभव से सीखने और समय के साथ ढालने की क्षमता द्वारा संवर्धित किया जाता है । एक प्रकार से मशीन मानव की तरह व्यवहार करने लगे इसी को कृत्रिम बुद्धिमता का नाम दिया गया है ।एक मशीन मानव की तरह व्यवहार करने ( कृत्रिम बुद्धिमता ) के लिए अनेक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करती है उनमे से मशीन लर्निंग भी एक प्रौद्योगिकि है ।

ai3MACHINE LEAERNING  आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का एक हिस्सा माना गया है। मशीन लर्निंग, 1959 में आर्टुर सैमुअल द्वारा गढ़ा गया एक शब्द है  जिसका अर्थ था “स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए बिना सीखने की क्षमता।” मशीन लर्निंग में डेटा का  विश्लेषण करना और उससे सीखने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करना और परिणामस्वरूप भविष्यवाणी करना शामिल है। किसी विशेष कार्य के लिए विशेष निर्देश के साथ हाथ से सॉफ्टवेयर को कोड करने के बजाय, बड़ी मात्रा में डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करके मशीन को “प्रशिक्षित” किया जाता है, और बदले में विशिष्ट कार्यों को करने की क्षमता प्राप्त की जाती है। मूल रूप से मशीन लर्निंग एक प्रकार का एल्गोरिद्म है जो किसी सॉफ्टवेयर को सही रूप से चलाने में मदद करता है । इस प्रकार कम्प्यूटर मानव मस्तिष्क की भांति सोचने और कार्य करने की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं जिसमें समय के साथ निरंतर विकास होता रहता है।

AI के रोज़मर्रा मे होने वाले कुछ उपयोग

1.Smartphone मे प्रयोग होने वाले speech recognition

2.बिना ड्राईवर के चलने वाली गाड़िया और Drones

3.Video गेम्स मे कम्प्युटर द्वारा आपको निर्देशित करना

4.इंटरनेट पर किए गिए search प्रोडक्टस का अन्य sites पर add के रूप दिखाया जाना

5.Google मैप्स को नेविगेट करने, या उबर को कॉल करने, या फ्लाइट टिकट बुक करने के लिए, आप AI का उपयोग कर रहे हैं।

6.स्मार्टफोनों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित असिस्टेंट दिये जाते हैं, जैसे कि गूगल असिस्टेंट।

नीति आयोग द्वारा AI के लिए चिन्हित कुछ क्षेत्र

a) हेल्थकेयर: हेल्थकेयर में AI के अनुप्रयोग उच्च बाधाओं के मुद्दों को हल करने में मदद मिल सकती है , विशेष

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रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जो खराब कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य पेशेवरों के सीमित आपूर्ति से पीड़ित हैं। निदान ( diagnostics ), व्यक्तिगत उपचार, संभावित महामारी की प्रारंभिक पहचान और इमेजिंग डायग्नोस्टिक्स इत्यादि मे इसका प्रयोग किया जा सकता है । इससे कुछ गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर के इलाज मे अत्यधिक मदद मिलेगी।

 

b) कृषि: अपर्याप्त मांग की भविष्यवाणी, सुनिश्चित सिंचाई की कमी, और कीटनाशकों और उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग / दुरुपयोग जैसी चुनौतियों का समाधान करने मे यह लाभदायक सिद्ध होगा । वास्तविक समय पर सलाह देकर फसल उत्पादन मे वृद्धि , कीड़ो के प्रकोप का पूर्वानुमान देना , बुवाई के समय फसलों के मूल्यो की पूर्व जानकारी देना ये सभी कार्य बहुत ही आसानी से संभव हो सकेंगे ।

c) ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सहित स्मार्ट मोबिलिटी: ड्राइवर की सहायता करने मे , इंजन की निगरानी और रखरखाव और बेहतर यातायात प्रबंधन के माध्यम से।

d) खुदरा: खुदरा क्षेत्र एआई समाधानों के शुरुआती ग्रहणकर्ताओं में से एक रहा है। यह व्यक्तिगत सुझाव देकर, वरीयता-आधारित ब्राउज़िंग प्रदान करके और छवि-आधारित उत्पाद की खोज करके उपयोगकर्ता के ऑनलाइन शॉपिंग के अनुभव में सुधार करता है ।

e) विनिर्माण: विनिर्माण उद्योग के एआई के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक होने की उम्मीद है।लचीले और अनुकूलनीय तकनीकी के माध्यम से आर्टिफ़िश्यल लर्निंग को ‘भविष्य की फैक्टरी’ कहना अतिस्योक्ति नही होगा । अपरिचित या अप्रत्याशित स्थितियों का जवाब देने के लिए मशीनरी स्मार्ट निर्णय लेकर स्वचालित हो सकती हैं। इसके अन्य प्रभाव क्षेत्रों में इंजीनियरिंग (R & D प्रयासों के लिए AI), आपूर्ति श्रृंखला ,प्रबंधन (मांग पूर्वानुमान),उत्पादन (एआई लागत में कमी और दक्षता मे वृद्धि प्राप्त कर सकता है), रखरखाव , गुणवत्ता का आश्वासन (उदाहरण के लिए दोष और विचलन की पहचान करने के लिए मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के साथ विज़न सिस्टम) शामिल हैं ।

f) ऊर्जा: ऊर्जा क्षेत्र में संभावित उपयोग के मामलों में ऊर्जा प्रणाली मॉडलिंग और पूर्वानुमान शामिल हैं ।
बिजली संतुलन और उपयोग में दक्षता बढ़ाने मे मदद कर सकता है । AI स्मार्ट मीटर सक्षम बुद्धिमान ग्रिड के माध्यम से ऊर्जा के भंडारण को सक्षम कर सकता है,और फोटोवोल्टिक ऊर्जा की विश्वसनीयता और सामर्थ्य में भी सुधार करता है। विनिर्माण के समान ग्रिड अवसंरचना के पूर्वानुमानात्मक रखरखाव के लिए भी AI को तैनात किया जा सकता है।

g) स्मार्ट सिटीज: नए विकसित स्मार्ट शहरों और बुनियादी ढांचे मेंAI का एकीकरण भी मदद कर सकता है । तेजी से बढ़ती शहरी आबादी की माँगों को पूरा करना और उन्हें उन्नत गुणवत्ता प्रदान करना, भीड़ प्रबंधन में सुधार और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए याताया

ai5त नियंत्रण शामिल हैं।

h) शिक्षा और कौशल: AI भारतीय शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और पहुंच के मुद्दों को हल कर सकता है।सीखने के अनुभव को बढ़ाना, स्वचालन से प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और ड्रॉपआउट दर को पूर्वानुमान के द्वारा कम करने का प्रयास किया जा सकता है ।

 

ARTIFICIAL INTELLIGENCE के अनुप्रयोग की दिशा मे भारत के उठते कदम

1.नीति आयोग, इंटेल और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एप्लीकेशन आधारित शोध परियोजनाओं के विकास और क्रियान्वयन के लिये परिवर्तनीय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र की स्थापना करेंगे।इसका नाम International Center for Transformative Artificial Intelligence (ICTAI) रखा गया है। यह पहल नीति आयोग के कार्यक्रम ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिये राष्ट्रीय रणनीति’ का एक हिस्सा है।इस केंद्र की स्थापना बंगलुरु में होनी है और यह स्वास्थ्य देखभाल, कृषि और स्मार्ट गतिशीलता के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित समाधान के अनुसंधान का संचालन करेगा।

2.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने भावी कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करेगा।इसरो को उपग्रहों से बड़े पैमाने पर आँकड़े प्राप्त होते हैं, इस कार्य को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के ज़रिये मशीनों एवं सॉफ्टवेयर से कम समय में और ज्यादा निपुणता से किया जा सकता है।इसका सबसे बड़ा फायदा रिमोट सेंसिंग उपग्रहों से मिलने वाले आँकड़ों का विश्लेषण करने में होगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से इनका विश्लेषण कर रियल टाइम इस्तेमाल संभव हो सकेगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं की सूचनाएँ, फसलों की निगरानी, संसाधनों की सूचनाएँ एकत्र करना आदि कार्य बेहतर तरीके से किये जा सकेंगे।

चंद्रयान-2 में जिस रोवर को सतह पर उतारा जाना है, उसमें भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल किया गया है, ताकि यह सतह से नमूने लेकर मौके पर उनका परीक्षण कर रिपोर्ट भेजे। रोवर में कोई खराबी आई तो उसमें स्वत: मरम्मत की क्षमता होगी। गगनयान की मानव रहित दो फ्लाइटों में भी रोबोट भेजे जाएंगे।

3.भारत के केंद्रीय जल आयोग और गूगल के बीच हुए एक समझौते से बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने एवं बाढ़ संबंधी सूचनाएँ आम जनता को सुलभ कराने में आसानी होगी। इसके तहत केंद्रीय जल आयोग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग एवं भू-स्थानिक मानचित्रण के क्षेत्र में गूगल द्वारा की गई अत्याधुनिक प्रगति का उपयोग करेगा। इस पहल से संकट प्रबंधन एजेंसियों को जल विज्ञान संबंधी समस्याओं से बेहतर ढंग से निपटने में मदद मिल सकेगी ।

ARTIFICIAL INTELLIGENCE से संभावित खतरे

1.भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिन्स का कहना था कि मनुष्य हज़ारों वर्षों के धीमे जैविक विकासक्रम की सीमा है, जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का मुकाबला नहीं कर सकती।

2.इसे सबसे बड़ा खतरा तब हैं जब मशीनें बिना मानवीय हस्तक्षेप के नैतिक प्रश्नों पर फैसला लेने लगेंगी। जैसे जीवन, सुरक्षा, जन्म-मृत्यु, सामाजिक संबंध आदि फैसले।

3.आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में मनुष्यों के स्थान पर मशीनों से काम लिया जाएगा यह रोजगार की दृष्टि से उचित नही होगा ।

4.यदि मशीनें स्वयं ही निर्णय लेने लगेंगी और उन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे मनुष्य के लिये खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।

निष्कर्ष

मानव की मशीन पर निर्भरता के चलते AI मानव जाति के तकनीकी विकास में टिपिंग बिंदु होने जा रहा है। निर्णय लेने के लिए मशीनें और एल्गोरिदम का कभी इतना उपयोग नही किया गया था । इसलिए किसी भी रणनीति दस्तावेज़ के द्वारा AI को बढ़ावा देने से पूर्व आवश्यक रूप से एआई इकोसिस्टम के संभावित कारकों के बारे में जागरूक होना चाहिए। नैतिक आचरण को कमजोर करना, किसी की निजता पर प्रभाव डालना और सुरक्षा प्रोटोकॉल को कमजोर करना आदि कुछ जोखिम को कम करने की और ध्यान देने की जरूरत होगी ।इन जोखिमों को कम करने के लिए कदम इस तरह की किसी भी रणनीति का एक अभिन्न अंग होना चाहिए।

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