BLACK HOLE

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संदर्भ

BLACK HOLE

  1. यह ब्लैक होल की पहली छवि है।
  2. यह इवेंट होरिजन टेलीस्कोप प्रोजेक्ट (EVENT HORIZON PROJECT) द्वारा ली गयी है।
  3. ब्लैक होल को पूरे ब्रह्मांड का सबसे काला क्षेत्र माना जाता है।
  4. प्रकाश भी ब्लैक होल के अंदर से पारगमन नहीं कर सकता है।
  5. यह छवि पृथ्वी से 55 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित ब्लैक होल की  है।
  6. यह मेसियर 87 (MESSIER 87) नामक आकाशगंगा के केंद्र में है।
  7. ब्लैक होल्स में गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता हैं कि प्रकाश भी उनसे बच नहीं सकता है।

ब्लैक होल क्या  हैं?

  • यह अत्यंत गहन गुरुत्वाकर्षण का ब्रह्मांडीय पिंड है जहाँ से कुछ भी , प्रकाश भी नहीं बच सकता ( पारगमन  नहीं कर सकता ) है।
  • अधिकांश ब्लैक होल एक बड़े तारे के अवशेषों से बनते हैं ( वे तारे जो सुपरनोवा विस्फोट में मर जाते हैं)।

नोट : तारो मे अपना प्रकाश और ऊर्जा होती है।

  • यह ऊर्जा तारो मे लगातार हो रहे नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया के कारण होती है ।  नाभिकीय संलयन (NUCLEAR FUSION ) से निकली हुयी प्रचंड ऊष्मा के कारण तारा गुरुत्वाकर्षण संतुलन में रहता है । निरंतर चलते नाभिकीय संलयन से जब तारो में मौजूद हाइड्रोजन(Hydrogen) ख़त्म हो जाती है तो वह तारा धीरे धीरे ठंडा होने लग जाता है। इस प्रक्रिया मे ऐसे तारे जिनका द्र्व्यमान सूर्य के द्र्व्यमान से 1.4 गुना होता है वे अपने ही गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध खुद को नहीं संभाल पाते, और  इन तारों के अन्दर एक विष्फोट (explosion) होता है जिसको सुपरनोवा SUPERNOVA कहते हैं ।इस विस्फोट के बाद यदि उस तारे का कोई भारी अवशेष बचता है तो वह अत्यधिक घनत्व युक्त न्यूट्रॉन तारा (neutron star) बन जाता है । न्यूट्रॉन तारे अपार गुरुत्वीय खिंचाव होने के कारण संकुचित(Compress) होने लगता है और संकुचित होते होते अंत में एक निश्चित क्रांतिक सीमा(critical limit) तक संकुचित हो जाता है।  इस अपार , असाधारण संकुचन के कारण उसका space और Time भी विकृत(deform) हो जाता है और वह अदृश्य हो जाता हैं। यही अद्रश्य पिंड होते हैं जिनको ब्लैक होल(black hole) की संज्ञा दी जाती हैं ।
  • किसी  ब्लैक होल का सम्पूर्ण द्रव्यमान एक छोटे से बिंदु में केन्द्रित रहता है जिसे central singularity point कहते हैं।इस बिन्दु का आयतन शून्य और घनत्व अपार होता है। 4॰ जॉन माइकेल , पियरे साइमन , जॉन व्हीलर जैसे वैज्ञानिको के नाम ब्लैक होल की जानकारी से जुड़े हुए हैं मगर वैज्ञानिक प्रत्यक्षीकरण के साथ दुनिया के सामने आना वाला सबसे पहला black hole Cygnus X1 था । इसकी प्रत्यक्ष पुष्टि 1972 में की गयी ।

EVENT HORIZON क्या होता हैं?

  1. यह ब्लैक होल की परिधि है। SINGULARITY के आस पास की गोलाकार सीमा या क्षितिज को EVENT HORIZON कहा जाता है ।
  2. इस EVENT HORIZON के बाहर प्रकाश या कोई और वस्तु नहीं जा सकती और ना ही वहां समय का कोई अस्तित्व है ।
  3. ब्लैक होल स्वयं अदृश्य हैं, परंतु  आवेशित कणों के साथ उनके चारों ओर का द्रव्य ( matter ) दिखाई देता है।4.जितना बड़ा ब्लैक होल होगा उससे उतने ही बड़े पैमाने पर होने वाले इवेंट होराइजन के होने की संभावना होती है।इस स्थिति मे विकिरण  से प्राप्त जानकारी भी अधिक होती है।

 

रोचक तथ्य : 

Einstein के special theory of relativity  के अनुसार ब्लैक होल की क्षितिज से कुछ दूर एक निश्चित सीमा पर खड़े  प्रेक्षक की घडी बहुत धीमी हो जाएगी  अर्थात वहां का time बहुत slow  चलेगा । समय निरपेक्ष होता है और समय का बहाव ब्रह्माण्ड की विभिन जगहों पर अलग अलग गति में है। धरती पर जो टाइम चल रहा है ब्रह्माण्ड में कही दूर टाइम इस से Fast या slow  चल रहा होगा ।

ब्लैक होल को देखने के लिए क्या प्रबंध किया जाता है ?

खगोलविदों ने अल्ट्रा-सेंसिटिव टेलीस्कोप के एक नेटवर्क का गठन किया, जिसे EVENT HORIZON TELESCOPE कहा जाता है। वे सभी टेलेस्कोप अपने अपने स्थ्लो से समर्पित रूप से विकिरण को पकड़ने की दिशा में प्रशिक्षित किए जाते हैं  और वे ब्लैक होल की परिधि से एक वास्तविक तस्वीर को खींचने की कोशिश करते हैं।

  1. उन्होंने ब्लैक होल के इवैंट होरीज़ोन से निकले कणों के जेट ( jet ) से विद्युत चुम्बकीय विकिरण (electromagnetic radiation ) के तरंग दैर्ध्य(wavelength) को पकड़ने का प्रयास किया ।
  2. इवेंट होरिजन टेलीस्कोप टीम ने M87 और Sagittarius A* ( मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र में ब्लैक होल ) का अप्रैल 2017 में पांच रातों में अवलोकन किया। यह ऐसे आठ रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करके किया गया जो एक मिलीमीटर के तरंग दैर्ध्य के प्रति भी संवेदनशील होते हैं।
  3. वे दूरबीन हवाई से एरिजोना, मैक्सिको से स्पेन और चिली से दक्षिणी ध्रुव तक फैले हुए थे ।

INTERFEROMETRY

यह दुनिया भर के आठ दूरबीनों के विकिरण को इस तरह से जोड़ती है कि यह एक एकल दूरबीन द्वारा लिए गए विकिरण के रूप में प्रकट होता है। इस प्रक्रिया को interferometry कहा जाता है ।

यह उल्लेख करना जरूरी है कि दो ब्लैक होल द्वारा उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला ( Laser Interferometer Gravitational Wave Observatory )  द्वारा 2015 में लगाया गया था।

डेटा कैसे संकलित किया गया था?

  1. जनरेट किया गया डेटा इतना बड़ा था कि उन्हें इंटरनेट पर प्रसारित नहीं किया जा सकता था।
  2. दक्षिणी ध्रुव के आंकड़ों में लगभग एक साल का समय लगा क्योंकि मौसम खराब होने के कारण इसे प्रेषित नही किया जा सका ।
  3. वैज्ञानिकों की टीमों द्वारा कुल 4 पेटाबाइट के रिकॉर्ड किए गए डाटा को सुपर कंप्यूटरों में डाला गया।
  4. टीमों ने Sgr A * से परिणाम की रिपोर्ट नहीं दी क्योंकि M87 के डाटा की गुणवत्ता उससे  बेहतर थी।

निस्कर्ष

  1. M87 की ब्लैक होल छवि इंजीनियरिंग कौशल की प्रमाणिकता सिद्ध करती है।
  2. यह वैज्ञानिक उपकरणों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बनाने में मदद करेगा।
  3. ब्लैक होल की यह छवि और डेटा आने वाले समय मे यह जानने मे मदद करेगी की वे कैसे काम करते हैं, कैसे उनके आसपास मोजूद आवेशित कणो के जेट की चमक ने हमें उन्हें देखने के लिए सक्षम किया, वास्तव में ये कैसे व्यवहार करते हैं आदि ।
  4. यह सदियो तक चले इस सैद्धांतिक कार्य की पुष्टि करता है, कि ब्लैक होल वास्तव में वास्तविक वस्तुएं हैं।

हमारा ब्रह्मांड इतना विशाल और रहस्यमयी है की हमारी सोच और कल्पना भी वहाँ तक नहीं पहुँच सकती किन्तु फिर भी अधिक से अधिक जानकारी हासिल करने की इंसानी जिद नित नए राज खोलती रहेगी ।

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