FINANCIAL ACTION TASK FORCE II वित्तयी कार्यवाई कार्यदल II FATF

FINANCIAL ACTION TASK FORCE II वित्तयी कार्यवाई कार्यदल II FATF

FINANCIAL ACTION TASK FORCE II वित्तयी कार्यवाई कार्यदल II FATF

FINANCIAL ACTION TASK FORCE II वित्तयी कार्यवाई कार्यदल: वैश्विक स्तर पर आतंकी संगठनों पर नज़र रखने वाली संस्था FATF ( The Financial Action Task Force) की बैठक में फैसला लिया गया है कि पाकिस्तान अभी ‘ग्रे लिस्ट’ में ही बरकरार रहेगा।

FINANCIAL ACTION TASK FORCE II वित्तयी कार्यवाई कार्यदल II FATF

Financial Action Task Force (FATF) क्या है?

1.फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी निकाय है जो 1989 में जी-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में स्थापित किया गया था।

2.एफएटीएफ का उद्देश्य मानकों को निर्धारित करना और धन शोधन, आतंकवादी वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए अन्य संबंधित खतरों से निपटने के लिए कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है।

3.FATF एक “नीति-निर्माण निकाय” है जो इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय विधायी और नियामक सुधार लाने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति उत्पन्न करने के लिए काम करता है।

4. शुरुआत में FATF का मकसद मनी लॉड्रिग को रोकना था। 2001 में इसके कार्य क्षेत्र का विस्तार किया गया।इसके कार्यक्षेत्र में आतंकी फंडिंग को रोकना भी शामिल हो गया।इसके बाद से FATF आतंकी फंडिंग पर रोक के लिये नीतियाँ बनाती है और उनके प्रभावी अमल पर भी नज़र रखती है।

5. शुरुआत में FATF में 16 सदस्य देश शामिल थे। फिलहाल FATF में कुल 38 सदस्य देश हैं। इनमें 36 देशों के साथ दो क्षेत्रीय संस्थाएँ यूरोपियन कमीशन और गल्फ ऑफ कोऑपरेशन कौंसिल शामिल हैं। भारत 2010 में FATF का सदस्य बना। पाकिस्तान इसका सदस्य नहीं है। इंडोनेशिया और सऊदी अरब इसमें पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हैं।

6.FATF का अध्यक्ष सदस्य देशों में से ही एक साल के कार्यकाल के लिये चुना जाता है। अध्यक्ष का कार्यकाल 1 जुलाई से शुरू होता है और अगले साल 30 जून को खत्म होता है।

7. इसका सचिवालय पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग विकास संगठन [ OECD ] के मुख्यालय में स्थित है।

8. FATF की डिसीज़न मेंकिंग बॉडी FATF प्लैनरी है जिसकी हर साल तीन बार बैठक होती है।

Financial Action Task Force (महत्वपूर्ण कार्य)

1.एफएटीएफ ने अनुशंसाओं की एक श्रृंखला विकसित की है, जिन्हें मनी लॉन्ड्रिंग ,आतंकवाद के वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों (weapons of mass destruction) के प्रसार का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक के रूप में मान्यता प्राप्त है।

2. वे वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए इन खतरों के लिए एक समन्वित प्रतिक्रिया का आधार बनाते हैं |

3.1990 में पहली बार जारी किए गए । 1996, 2001, 2003 में FATF सिफारिशों को संशोधित किया गया था और हाल ही में 2012 में यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे अद्यतित [ updated ] और प्रासंगिक रहें,इन्हे संसोधित किया गया था ।

4.एफएटीएफ आवश्यक उपायों को लागू करने, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण तकनीकों और काउंटर-उपायों की समीक्षा करने में अपने सदस्यों की प्रगति की निगरानी करता है, और विश्व स्तर पर उपयुक्त उपायों को अपनाने और लागू करने को बढ़ावा देता है।

5.अन्य अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों के सहयोग से, एफएटीएफ अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को दुरुपयोग से बचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर की कमजोरियों की पहचान करने के लिए काम करता है।

6.FATF ने मनी लांड्रिंग और आतंकी फंडिंग के खतरे से निपटने के लिये 40 सुझावों के साथ ही 9 विशेष सुझाव दिये हैं। दुनिया के तमाम देशों ने इन सुझावों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तौर पर स्वीकार किया है। इन चुनौतियों से निपटने में ये सुझाव काफी कारगर साबित हुए हैं।

GREY LIST AND WHITE LIST [ ग्रे लिस्ट’ और ‘ब्लैक लिस्ट’ ]

1.‘ग्रे लिस्ट’का मतलब यह है कि जिस देश पर संदेह होता है कि वह ऐसी कार्यवाही नहीं कर रहा है जिससे कि आतंकवादी संगठन को फंडिंग न हो तो उसे ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा जाता है

2. अगर यह साबित हो जाए कि उस देश से आतंकी संगठन को फंडिंग हो रही है और जो कार्यवाही उसे करनी चाहिये वह नहीं कर रहा है तो उसका नाम ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल दिया जाता है।
वर्तमान में इरान और उत्तर कोरिया को FATF के तहत ‘ब्लैक लिस्ट’ में रखा गया है।

Financial Action Task Force के हालिया फैसले

वैश्विक स्तर पर आतंकी संगठनों की फंडिंग पर नज़र रखने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’में बरकरार रखा है। उसकी यह स्थिति अक्तूबर तक कायम रहेगी।यह निर्णय 17 से 22 फरवरी तक फ्राँस की राजधानी पेरिस में हुई इस संस्था की बैठक में यह लिया गया। पुलवामा में CRPF के जवानों पर हुए हमलों में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शामिल होने के बाद भारत की दलील थी कि आतंकियों की फंडिंग पर रोक लगाने के लिये पाकिस्तान कोई कदम नहीं उठा रहा है।FATF ने पाकिस्तान को चेताया है कि वह आतंकी फंडिंग को रोकने के लिये एक्शन प्लान पर काम करे अन्यथा उसे ब्लैक सूची मे दल दिया जाएगा ।FATF ने पाकिस्तान को पिछले साल भी पाकिस्तान को ‘ग्रे सूची’ में डाल दिया था।
इस बार की बैठक में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि हमेशा चीन और सऊदी अरब ने भी ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर आने की उसकी मांग का समर्थन नहीं किया।
इस मुद्दे पर पाकिस्तान झूठा दावा करता रहा है। पाकिस्तान के दावे की जाँच करने के लिये साल 2018 में FATF के एशिया पैसेफिक ग्रुप की 9 सदस्यीय टीम पाकिस्तान गई थी। यह टीम 12 दिनों तक पाकिस्तान में रही। टीम ने अपनी जाँच में पाया कि आतंकी फंडिंग रोकने के लिये पाकिस्तान ने जो प्रयास किये हैं और कानूनी ढाँचा बनाया है वह कुछ खास कर पाने के लिये नाकाफी है।यह ढाँचा आतंकी फंडिंग के सुगठित तंत्र को खत्म कर पाने में सक्षम नहीं है। इस जाँच टीम की रिपोर्ट के आधार पर FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया ।हालाँकि इससे पहले भी साल 2012 और 2015 में पाकिस्तान को इस सूची में रखा गया था।
ध्यान रहे की FATF सिर्फ निगरानी इकाई है और सुझावो का पालन नही करने पर किसी प्रकार की कानूनी कार्यवाही करना इसके अधिकार क्षेत्र मे नही आता है ।

Financial Action Task Force के फैसलो का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

यदि किसी देश को काली सूची में डाल दिया जाता है तो उसे आर्थिक मोर्चे पर और कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। दूसरे देश उस देश में निवेश करना बंद कर देंगे। एक प्रकार से कहे तो अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग मिलना बंद हो जाएगा। विदेशी कारोबारियों और बैंकों का उस देश में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपना कारोबार समेट सकती हैं।
विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और यूरोपियन यूनियन जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से क़र्ज़ मिलना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा मूडीज़, स्टैंडर्ड एंड पूअर जैसी कंपनियाँ उसकी रेटिंग भी घटा सकती हैं।

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