Indus Valley Civilization – सिन्धु घाटी की सभ्यता

Indus Valley Civilization-सिन्धु घाटी की सभ्यता

Indus Valley Civilization || सिन्धु घाटी की सभ्यता

1826 में चार्ल्स मैसेन ने पहली बार इस पुरानी सभ्यता के बारे में पता लगाया था। 1856 में कराची से लाहौर के मध्य रेलवे लाइन के निर्माण के दौरान बर्टन बंधुओं द्वारा हड़प्पा स्थल की सूचना सरकार को दी थी। एलेक्जेंडर कनिंघम ने 1856 में इस सभ्यता के बारे में सर्वेक्षण किया था। इसी क्रम में 1861 में एलेक्जेंडर कनिंघम के निर्देशन में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग (ASI) (Archaeological Survey of India) की स्थापना की गई तथा कनिंघम इसके प्रथम महानिदेशक (Director General) बनाए गए। 1904 में लार्ड कर्जन द्वारा जॉन मार्शल को भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग का महानिदेशक (Director General) बनाया गया।1921 में माधो स्वरुप वत्स तथा दयाराम साहनी ने हड़प्पा का उत्खनन प्रारम्भ किया। इस प्रकार इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता रखा गया। इन्हीं खोजों के आधार पर 1924 में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के महानिदेशक जॉन मार्शल ने पूरे विश्व के समक्ष सिन्धु घाटी में एक नवीन सभ्यता की खोज की घोषणा की। यह सभ्यता सिन्धु नदी घाटी में फैली हुई थी इसलिए इसका नाम सिन्धु घाटी सभ्यता रखा गया। प्रथम बार नगरों के उदय के कारण इसे प्रथम नगरीकरण भी कहा जाता है। प्रथम बार कांसे के प्रयोग के कारण इसे कांस्य सभ्यता भी कहा जाता है।

महत्वपूर्ण नगर (Important Towns)

मोहनजोदड़ो (Mohenjo-daro): जिसका सिंधी भाषा में आशय मृतको का टीला होता है, सिंध प्रान्त के लरकाना जिले में स्थित सैन्धव सभ्यता का महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ से वृहत स्न्नानागार, अन्नागार के अवशेष, पुरोहित कि मूर्ती इत्यादि मिले है।

हड़प्पा (Harappa): यह पहला स्थान था, जहाँ से सैन्धव सभ्यता के सम्बन्ध में प्रथम जानकारी मिली।यह पाकिस्तान में पश्चिमी पंजाब प्रान्त के मांटगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित है। अर्ध-औद्योगिक नगर’ कहा है।

चन्हूदड़ो (Chanhu-daro): यह सैन्धव नगर मोहनजोदड़ो से किलोमीटर दक्षिण में सिंध प्रान्त में ही स्थित था। इसकी खोज 1934 ई० में ऐन, जी, मजूमदार ने की तथा 1935 में मैके द्धारा यहाँ उत्खनन कराया गया। यहाँ के मनके बनाने का कारखाना, बटखरे।तथा कुछ उच्च कोटि की मुहरे मिली है। यही एक मात्र ऐसा सैन्धव स्थल है जो दुर्गीकृत नहीं है।

लोथल।(Lothal): यह नगर गुजरात में खम्भात की खाड़ी में भोगवा नदी के किनारे स्तिथ है। जो महत्वपूर्ण सैन्धव स्थल तथा बंदरगाह नगर भी था। यहाँ से गोदी (Duckyard )के साक्ष्य मिले है लोथल में नगर का दो भागो में विभाजन होकर एक ही रक्षा प्राचीर से पूरे नगर को दुर्गीकृत किया गया है।

कालीबंगा (Kalibangan): कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ होता है काली रंग की चूड़ियां। यह सैन्धव नगर राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्तिथ है यहाँ के भवनों का निर्माण कच्ची ईंटो द्धारा हुआ था तथा यहाँ से अलंकृत ईंटो के साक्ष्य मिले है। जुते खेत, अग्निवेदिका, सेलखड़ी तथा मिटटी की मुहरे एवम मृदभांड यहाँ उत्त्खनन से प्राप्त हुए है।

सुत्कागेंडोर (Sutkagen dor): सैन्धव सभ्यता का यह सुदूर पश्चिमी स्थल पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त में स्तिथ है।यह सैन्धव सभ्यता का पश्चिम में अंतिम बिंदु है। यहाँ से एक किले का साक्ष्य मिला है, जिसके चारो ओर रक्षा प्राचीर निर्मित थी।

बनावली (Banawali): हरियाणा के हिसार जिले में स्तिथ इस स्थल से कालीबंगा की तरह हड़प्पा पूर्व और हड़प्पाकालीन, दोनों संस्कृतियों के अवशेष मिले है। यहाँ से अग्निवेदिया, लाजवर्दमनी, मनके, हल की आकृति, तिल सरसो का ढेर, अच्छे किस्म के जो, नालियों की विशिस्टता, तांबे के वाणाग्र आदि मिले है।

Indus Valley Civilization-सिन्धु घाटी की सभ्यता
Indus Valley Civilization || सिन्धु घाटी की सभ्यता

सैंधव सभ्यता के प्रमुख स्थल (Main Sites of Indus Valley Civilization)

स्थल नदियों के नाम उत्त्खनन वर्ष उत्तखननकर्ता
हड़प्पा रावी 1921 दयाराम साहनी और माधोस्वरूप वत्स
मोहनजोदड़ो सिन्धु 1922 राखलदास बनर्जी
चन्हूदड़ो सिन्धु 1931 गोपाल मजूमदार
कालीबंगा घग्घर 1953 बी.बी.लाल और बी.के. थापर
रोपड़ सतलज 1953-56 यज्ञदत्त शर्मा
लोथल भोगवा 1955 1962 रंगनाथ राव
आलमगीरपुर हिंडन 1958 यज्ञदत्त शर्मा
बनावली रंगोई 1974 रविन्द्रनाथ विष्ट
धौलावीरा 1990-91 रविन्द्रनाथ विष्ट

 

सैन्धव निवासियों द्धारा आयातित वस्तुएं 

वस्तु स्थान वस्तु स्थान
सोना अफगानिस्तान, ईरान, द.भारत तांबा खेतड़ी (राजस्थान), बलूचिस्तान
टिन ईरान, अफगानिस्तान कीमती पत्थर बलूचिस्तान, राजस्थान
चांदी ईरान, मेसोपोटामिया फिरोजा ईरान
लाजवर्द मणि बदख्शां सेलखड़ी ईरान

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य जो परीक्षा के दृश्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • भारत में वास्तुकला का आरंभ सिंधु वासियों ने ही किया था.
  • हड़प्पा की खुदाई से मिले साक्ष्यों के आधार पर कहा जा सकता है यह सभ्यता व्यापारी एवं शिल्पियों के हाथों में थी.
  • सिंधु सभ्यता के लोग अन्य सभ्यता के लोगों के साथ भी व्यापार करते थे.
  • सिंधु वासी अपने आभूषणों में सोना, चांदी, तांबा, धातु का प्रयोग करते थे साथ ही यह लोग कीमती पत्थर से बने आभूषणों को भी बहुत चाव से पहनते थे
  • कालीबंगा की खुदाई में जूते हुए खेत के प्रमाण भी मिले हैं.
  • सिंधु वासी स्वास्तिक चिन्ह बनाना जानते थे मोहनजोदड़ो की खुदाई से एक मोहर पर स्वास्तिक चिन्ह के निशान मिले है.
  • सिंधु सभ्यता वासियों के घरों के फर्श आमतौर पर कच्चे होते थे सिर्फ कालीबंगा से कुछ पक्के फर्श के साक्ष्य मिले हैं.
  • विश्व में सर्वप्रथम कपास की खेती करने का श्रेय सिंधु वासियों को ही जाता है.
  • सिंधु सभ्यता वासी चावल और बाजरा की खेती करना भी जानते थे चावल और बाजरा के साक्ष्य लोथल से मिले हैं
  • लोथल एक ऐसा स्थान था जो सिंधु सभ्यता वासियों का प्रमुख बंदरगाह था.
  • मोहनजोदड़ो की खुदाई से एक विशाल स्नानघर भी मिला है.
  • बनावली से मिले हल के प्रमाण के आधार पर कहा जा सकता है कि यह लोग हल चलाना भी जानते थे.
  • सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत का नाम अन्नागार है जो मोहनजोदड़ो की खुदाई से मिली.
  • यह लोग क्रय विक्रय वस्तु विनिमय आधार पर व्यापार किया करते थे
  • सिंधु वासी हाथी और घोड़े से परिचित थे परंतु उन्हें फालतू नहीं बना सके.
  • सिंधु लिपि को पढ़ने का सर्व प्रथम प्रयास L A vadel ने किया था
  • सिंधु सभ्यता के समय मुद्रा प्रणाली का प्रचलन नहीं था.
  • सिंधु सभ्यता के लोग तांबा, चांदी, सोना, शीशा, आदि का व्यापार करते थे यह लोग अफगानिस्तान, ईरान, दक्षिण भारत, तक व्यापार किया करते थे.
  • सुरकोटदा की खुदाई से घोड़े के होने के प्रमाण मिले हैं.
  • सिंधु वासी लिखते समय चिड़िया, मछली,मानवकृति आदि का प्रयोग किया करते थे. सिंधु लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी
  • सन 1999 तक सिंधु सभ्यता के 1056 नगरों की खोज हो चुकी थी.1056 नगरों की खोज के कारण ही इस सभ्यता को नगरीय सभ्यता कहां गया.
  • सिंधु सभ्यता वासी तौल की इकाई में 16 का अनुपात रखते थे.
  • सिंधु सभ्यता के लोग मंदिर नहीं बनाते थे ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि अब तक की खुदाई से एक भी मंदिर के प्रमाण नहीं मिले हैं.
  • हड़प्पा वासी मुख्य रूप से कूबड़ सांड की पूजा करते थे.
  • सिंधु सभ्यता के मुख्य निवासी द्रविड़ और भूमध्यसागरीय थे
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से मोहनजोदड़ो सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर था.
  • सिंधु सभ्यता की लिपि भाव चित्रात्मक थी.
  • कारखानों के साक्ष्य लोथल और चन्हुदडो से प्राप्त हुए हैं
  • सिंधु सभ्यता वासी मातृदेवी की भी पूजा करते थे.
  • सिंधु सभ्यता में मानव के साथ कुत्ते को दफनाने की प्रथा भी प्रचलित थी ऐसी ही एक प्रथा के साक्ष्य रोपड़ से प्राप्त हुए हैं.
  • सिंधु सभ्यता को ProHistoric युग का माना गया है.
  • सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक स्थल गुजरात में खोजे गए हैं.
  • सिंधु सभ्यता वासियों ने मनके बनाने के लिए कारखाने लगा रखे थे.
  • सिंधु सभ्यता की मुख्य फसलें गेहूं और जो थी.
  • सिंधु सभ्यता की लिपि को अब तक समझा नहीं जा सका है.
  • सिंधु सभ्यता वासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि पर आधारित था.यह लोग जो, बाजरा ,चावल, कपास आदि की खेती करते थे
  • सिंधु सभ्यता मातृ प्रधान सभ्यता थी.
  • बनावली से मिले बैलगाड़ी के खिलौने के साक्ष्य के आधार पर कहा जा सकता है कि यह लोग खेती के लिए बैलगाड़ी का प्रयोग करते थे
  • हड़प्पा की खुदाई से कुछ महत्वपूर्ण चीजें प्राप्त हुई हैं जैसे शंख का बना हुआ बैल, नटराज की आकृति    वाली मूर्ति, पैर में सांप दबाए गरुड़ का चित्र ,मछुआरे का चित्र, आदि
  • मोहनजोदड़ो की खुदाई से भी कुछ महत्वपूर्ण चीजे मिले हैं. जैसे पक्की ईट ,कांसे की एक नर्तकी की मूर्ति,  सीडी आदि के साक्ष्य मिले हैं.
  • मोहनजोदड़ो को मृतकों का टीला भी कहा जाता है.
  • कालीबगा से विकसित हड़प्पा सभ्यता के साक्ष्य मिले.
  • हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो में असंख्य देवियों की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। ये मूर्तियां मातृदेवी या प्रकृति देवी की हैं.
  • हड़प्पा में पकी मिट्टी की स्त्री मूर्तिकाएं भारी संख्या में मिली हैं। एक मूर्ति में स्त्री के गर्भ से निकलता एक पौधा दिखाया गया है। विद्वानों के अनुसार यह पृथ्वी देवी की प्रतिमा है.
  • .इतिहाकारों के अनुसार सबसे पहली बार कपास उपजाने का श्रेय हड़प्पावासियों को ही दिया जाता है
  • इस सभ्यता की समकालीन सभ्यता मेसोपोटामिया थी.
  • हड़प्पा वासी मिटी के बर्तनो पर लाल रंग का प्रयोग करते थे.
  • 1500 ईसा पूर्व के आसपास सिंधु सभ्यता का पतन हो गया
  • इतिहासकारों के अनुसार हड़प्पा सभ्यता के निर्माता द्रविड़ लोग थे
  • 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद सिंधु सभ्यता के दो प्रमुख नगर मोहनजोदड़ो और हड़प्पा पाकिस्तान का हिस्सा बन गए.
  • अंतिम समय में सिन्धुवासी मुख्य रूप से कार्नियो-फेसिअल मानसिक आघात नामक बीमारी से ग्रसित थे, यह बीमारी तेज़ी से फेल रही थी.
  • हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त मोहरो को सर्वोत्तम कलाकृतियों का दर्जा प्राप्त है.
  • चार्ल्स मेसन ने वर्ष 1842 में पहली बार हड़प्पा सभ्यता को खोजा था। इसके बाद दया राम साहनी ने 1921 में हड़प्पा की आधिकारिक खोज की थी.
  • पुरातात्विक विभाग के सर्वे के अनुसार हड़प्पा काल के अंतिम समय में हड़प्पा घाटी के लोग कयी बीमारियों से जूझ रहे थे.

 

BPSC PRE में पूछे गये प्रश्न जो सिन्धु घाटी की सभ्यता से संबंधित हैं.
NO. प्रश्न उत्तर
1. सिंधु सभ्यता संबंधित है आद्य ऐतिहासिक युग
2.

निम्नलिखित में से कौन हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के उत्खनन से संबंधित नहीं थे

वी. ए. स्मिथ

 

अन्य परीक्षाओ में पूछे गये प्रश्न जो की  सिन्धु घाटी की सभ्यता से संबंधित हैं
NO. प्रश्न उत्तर
1 हड़प्पा सभ्यता के संपूर्ण क्षेत्र का आकार किस प्रकार का था त्रिभुजाकार
2 हड़प्पा कालीन लोगों ने नगरों में सर घरों के विन्यास के लिए कौन सी पद्धति अपनाई ग्रीड पद्धति
3 निम्नलिखित पशुओं में से किस एक का हड़प्पा संस्कृति में पाई मुहावरों और टेराकोटा कला कृतियों में निरूपण नहीं हुआ था  गाय
4 वस्त्रों के यह कपास की खेती का आरंभ सबसे पहले किया गया भारत में
5 हाथी दांत का पैमाना कहां से प्राप्त हुआ है लोथल
6 कौनसा हड़प्पा नगर तीन भागों में विभक्त है धोलावीरा
7 अपवाह तंत्र का निर्माण सबसे पहले निम्नलिखित में से किस सभ्यता के लोगों ने किया था सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों ने
8 निम्नलिखित में से कौनसा स्थल घग्गर और उसकी सहायक नदियों की घाटी में स्थित है बनवाली
9 एक उन्नत जल प्रबंधन व्यवस्था का साक्ष्य प्राप्त हुआ है धौलावीरा से
10 हड़प्पा सभ्यता के अंतर्गत जोते गए खेत का साक्ष्य कहां से मिला है कालीबंगा
11 निम्नलिखित में से कौन हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के उत्खनन से संबंधित नहीं थे वी ए स्मिथ
12 निम्नलिखित में से किसे मृतकों का टीला के नाम से जाना जाता है मोहनजोदारो
13 धोलावीरा जिस राज्य में स्थित है वह है  गुजरात
14 लेखन कला की उचित प्रणाली विकसित करने वाली सर्वप्रथम प्राचीन सभ्यता थी सुमेरिया
15 निम्नलिखित में से कौन सा एक हड़प्पा का बंदरगाह है लोथल
16 मोहनजोदारो निम्नलिखित में से कहां पर स्थित है पाकिस्तान के सिंध प्रांत में
17 सिंधु घाटी के लोग पूजा करते थे पशुपति की
18 सिंधु सभ्यता के घरों के दरवाजे और खिड़कियां सड़क की ओर ना खुलकर पिछवाड़े की ओर खुलते थे किस नगर के घरों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर होते थे लोथल
19 निम्नलिखित में से कौन सी सभ्यता नील नदी के तट पर प्रारंभ हुई मिस्र की सभ्यता
20 हड़प्पा संस्कृति की जानकारी का प्रमुख स्रोत क्या है पुरातात्विक खुदाई
21 सिंधु घाटी सभ्यता का कौन सा स्थान अब पाकिस्तान में है  हरप्पा
22 मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा के पुरातात्विक खुदाई के प्रभारी कौन थे सर जॉन मार्शल
23 भारत में चांदी की उपलब्धता के प्राचीनतम साक्ष्य मिलते हैं हड़प्पा सभ्यता
24 सिंधु घाटी सभ्यता को आर्यों से पूर्व की रखे जाने का महत्वपूर्ण कारक है मृदभांड
25 हड़प्पा सभ्यता के अंतर्गत अलंकृत ईटों का साक्ष्य कहां से प्राप्त हुआ है कालीबंगा
26 एक जूते हुए खेत की खोज की गई थी कालीबंगा से
27 किस हड़प्पा स्थल से चावल उगाने का साक्ष्य सूचित हुआ है रंगपुर
28 सिंधु घाटी के लोग विश्वास करते थे मातृशक्ति में
29 भारत का सबसे बड़ा हरप्पन पुरास्थल है राखीगढ़ी
30 नर्तकी की कांसे मूर्ति कहां से प्राप्त हुई है मोहनजोदड़ो से
31 सिंधु सभ्यता का कौन सा स्थान भारत में स्थित है लोथल
32 सिंधु घाटी के लोगों की एक महत्वपूर्ण मूर्ति थी नृत्य करती हुई बालिका
33 सर्वप्रथम मानव ने निम्न धातु का उपयोग किया तांबा

 

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NOTE : हमने सिन्धु घाटी की सभ्यता की जानकारी/चित्र NCERT BOOK और कुछ ऑथेंटिक वेबसाइट से लिया हैं। यह पोस्ट BPSC /UPSC/SSC/और RAILWAY एग्जाम के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हैं। अगर आपको किसी भी प्रकार का कोई सुझाव या शिकायत है तो हमें bpscrightway@gmail.com पर संपर्क कर सकते है। हम जल्द से जल्द उस त्रुटि को दूर करने का प्रयास करेंगे।

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